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नकली मुद्रा
Aurangabad औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद जिले में पुलिस ने जाली नोटों की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कुल 2 लाख 48 हजार 500 रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं। बरामद किए गए सभी जाली नोट 500 रुपये के हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार औरंगाबाद के पुलिस अधीक्षक को जिले में जाली नोटों के परिवहन से संबंधित सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मदनपुर थाना क्षेत्र में विशेष जांच अभियान शुरू किया। मोटरसाइकिलों सहित अन्य वाहनों की सघन जांच के लिए पुलिस टीमों को तैनात किया गया।
रात करीब 8 बजकर 10 मिनट पर मदनपुर थाना मोड़ के पास पुलिस टीम वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान गया की ओर से मोटरसाइकिल पर आ रहा एक व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने का प्रयास करने लगा। संदेह होने पर पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा किया और कुछ दूरी पर उसे पकड़ लिया। पुलिस ने जब आरोपी की तलाशी ली तो उसके पास से 500 रुपये के 297 जाली नोट मिले। इन नोटों की कुल कीमत 1 लाख 48 हजार 500 रुपये बताई गई है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 45 वर्षीय सुरेंद्र कुमार के रूप में हुई है, जो औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के बाबू बांध का रहने वाला बताया गया है।
इसके बाद पुलिस ने सुरेंद्र कुमार से पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक उससे मिली जानकारी के आधार पर मिठाइयां मोड़ के पास छापेमारी की गई। यहां से एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। उसकी पहचान गया जिले के बाराचट्टी थाना क्षेत्र के सोमिया निवासी 45 वर्षीय विजय यादव के रूप में हुई। पुलिस ने विजय यादव के पास से भी 500 रुपये के 200 जाली नोट बरामद करने का दावा किया है। इनकी कुल कीमत एक लाख रुपये है। इस तरह दोनों आरोपियों से कुल 497 नकली नोट बरामद हुए, जिनका अंकित मूल्य 2 लाख 48 हजार 500 रुपये है।
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। दोनों के खिलाफ मदनपुर थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अब पुलिस की जांच जाली नोटों के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर केंद्रित है। यह पता लगाया जा रहा है कि नकली नोट कहां तैयार किए गए थे, आरोपियों को यह खेप किसने उपलब्ध कराई और इसे किन इलाकों में खपाने की योजना थी। दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के जरिए सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
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